G7 लीडर्स से बातचीत में ट्रंप का दावा—ईरान जल्द सरेंडर करने वाला है

सीएनएन की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद करने की संभावना को कम आंका था.

वॉशिंगटन: डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार (स्थानीय समय) को ग्रुप ऑफ सेवन देशों के नेताओं के साथ फोन पर हुई बातचीत में कहा कि ईरान जल्द ही सरेंडर करने वाला है. यह जानकारी एक्सियोस ने तीन G7 देशों के अधिकारियों के हवाले से दी है, जो इस कॉल में शामिल थे.

यह कॉल उस समय हुई जब ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने बदला लेने की कसम खाई और नागरिकों से अमेरिका और इज़रायल के हमलों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की अपील की. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप युद्ध के नतीजे को लेकर निजी तौर पर भी उतने ही आत्मविश्वास से भरे हैं जितना कि सार्वजनिक तौर पर दिखते हैं.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष अब कई दिनों से सुर्खियों में बना हुआ है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रुप ऑफ सेवन (G7) देशों के नेताओं के साथ हुई बातचीत में दावा किया है कि ईरान जल्द ही आत्मसमर्पण करने वाला है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए सामने आई है, जिसमें कहा गया है कि ट्रंप ने फोन कॉल के दौरान यह विश्वास जताया कि युद्ध का परिणाम अमेरिका के पक्ष में जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, यह बातचीत बुधवार को हुई थी, जिसमें G7 देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। ट्रंप ने इस कॉल में कहा कि अमेरिका की सैन्य और रणनीतिक कार्रवाई के कारण ईरान की स्थिति कमजोर हो रही है और वह जल्द ही झुकने के लिए मजबूर होगा। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इस बातचीत के सभी विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन कॉल में शामिल तीन देशों के अधिकारियों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है।

ट्रंप ने सार्वजनिक मंचों के साथ-साथ अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर भी ईरान के खिलाफ सख्त रुख जाहिर किया। उन्होंने एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका ईरान के आतंकवादी शासन को सैन्य, आर्थिक और अन्य सभी तरीकों से कमजोर कर रहा है। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को भारी नुकसान पहुंचाया गया है, जबकि उनकी मिसाइल और ड्रोन क्षमता को भी काफी हद तक खत्म कर दिया गया है।

ट्रंप ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि अमेरिका के पास मजबूत सैन्य क्षमता, पर्याप्त हथियार और लंबा समय है, जिससे वह इस संघर्ष में निर्णायक जीत हासिल कर सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान पिछले कई दशकों से दुनिया भर में हिंसा और आतंक को बढ़ावा देता रहा है और अब अमेरिका उस पर कड़ा जवाब दे रहा है।

दूसरी तरफ ईरान ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों को चेतावनी दी है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा है कि उसने अपने सैन्य अभियान के नए चरण की शुरुआत कर दी है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान के तहत इजरायल के कब्जे वाले क्षेत्रों और पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। ईरान ने दावा किया कि उसके हमलों में उन्नत मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है, जिनमें भारी वारहेड लगाए गए थे।

ईरान के सैन्य कमांडरों ने कहा है कि उनकी सेनाएं दुश्मनों के खिलाफ “आखिरी सांस तक” लड़ने के लिए तैयार हैं और देश की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। उनका कहना है कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी हमले जारी रखते हैं, तो उन्हें इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। खासकर मध्य पूर्व के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य, को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। यदि इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, तो दुनिया भर में तेल आपूर्ति और व्यापार पर भी असर पड़ सकता है।

फिलहाल दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि तनाव कम होने के संकेत अभी नजर नहीं आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस संकट को लेकर चिंतित है और कई देश दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहे हैं।

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